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(एनएसटीएफडीसी की आदिवासी वनवासी सशक्तिकरण योजना)

 

1.        योजना का उद्देश्यः- भारत सरकार ने अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों के लिए (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 बनाया है। इस अधिनियम के अंतर्गत, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य परंपरागत वनवासियों को रहने और/अथवा खुद खेती करने या किसी अन्य परंपरागत गतिविधि के माध्यम से अपनी आजीविका  अर्जन हेतु वन भूमि धारण करने का अधिकार दिया गया है इस प्रस्तावित योजना का प्रयोजन अनुसूचित जनजातियों के वनवासियों को भूमि को उत्पाद उपयोग योग्य बनाने के प्रति जागरूक बनाना,उनमें स्किल,अप-स्किल/रि-स्पिल पैदा करना, एनएसटीएफडीसी का रियायती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना,बाजार में लिंकेज में सहायता करना, हैंड होल्डिंग समर्थन आदि उपलब्ध कराना हैं

 

2.        पात्रता  की शर्तें

.    अनूसूचित जनजाति का व्यक्ति, जिसे वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत भूमि अधिकार प्राप्त है

.    आवेदक के परिवार की वार्षिक आय गरीबी रेखा के दुगुनी (डीपीएल) से अधिक हो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह आय सीमा 81,000/-रुपए तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 1,04,000/-रुपए प्रतिवर्ष है

3.   सहायता राशि की प्रमात्राः

.    यूनिट लागतः इस योजना की इकाई लागत 1 लाख रुपए तक हो सकती है

.    सहायता की प्रमात्रा राशः एनएसटीएफडीसी की ओर से  रियायती ऋण के रूप में 50% तक की सहायता तथा शेष राशि जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारों को जारी टी.एस.पी.निधि से राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसी की सब्सिडी के माध्यम से दी जाती है अथवा राज्य सरकारों के किसी स्त्रा÷तों  से उपलब्ध कराई जाती है

      .      हैंडहोल्डिंग समर्थनः इसके लिए पारदर्शी तरीके से पूर्व निर्धारित चयन मानदंड के आधार पर चुने हुए गैर सरकारी संगठनों/अन्य चयनित निकायों द्वारा राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों/सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को सहायता प्रदान किया जाएगा यूनिट लागत का कुल 2%  हैंडहोल्डिंग निकायों, (जिसमें 1% योजना के अनुमोदन के पश्चात तथा 1% एक वर्ष के लिए योजना के सफल कार्यान्वयन पर) देय होगा इसकी पूर्ति केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों से सब्सिडी अवयव से की जाएगी

4.        ब्याज दरः एनएसटीएफडीसी राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों/बैंकों से 2.50% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज प्रभारित करेगा जबकि राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों/बैंक लाभार्थियों से 5% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज प्रभारित कर सकते हैं

5.                    पुनर्भुगतान अवधः-

.    योजना के लिए पुनर्भुगतान की अवधि कार्य की प्रकृति एवं ईकाई की धन अर्जन क्षमता के आधार पर निर्धारित की जानी है

. हालांिक ऋण की 05वर्ष की अधिकतम अवधि के अंदर तिमाही किश्तों से वापस चुकाया जाना है जिसमें 06 महीने की अधिस्थगन अवधि (मोराटोरियम पीरियड) शामिल है

6.        प्रस्तावित गतिविधियों की सूची

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लघु सिंचाई

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कृमि खाद

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अधिक पैदावार वाले बीज

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औषधीय/सजावटी पौधे

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बागवानी

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मुर्गी पालन

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रबड़ की खेती

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डेयरी

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सुपारी बागवानी

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भेड़/बकरी पालन

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लघु वन उत्पाद

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मधुमक्खी पालन

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रेशम उत्पाद

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फलों के बगीचे

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पुष्प उत्पादन

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टिप्पणी उपरोक्त सूची केवल संकेतात्मक सूची है तथा आवेदक  आय अर्जन करने वाले किसी अन्य व्यवहारिक कार्य  भी कर सकते हैं

7.             कार्यान्वयन /धन जारी करनाः-

           .                 राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयां आवेदकों के वर्तमान कौशल का आंकलन कर सकते हैं तथा जब भी आवश्यक, हो राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयां आवदेकों की पहचान करते हुए उन्हें समुचित प्रशिक्षण के लिए प्रायोजित कर सकते हैं

          .                  राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों के विशेष अनुग्रह पर एनएसटीएफडीसी द्वारा मंजूर योजनाओं के लिए निधि जारी की जाएगी बशर्ते कि संिवतरण हेतु निर्धारित मानकों जैसे निधियों का उपभोग, अतिदेय राशि का निपटान, सरकारी गारंटी, सब्सिडी इत्यादि, की पूर्ति करते हों

8.             निधि उपभोगः-

.            एनएसटीएफडीसी द्वारा निधियों के जारी होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों को निधियों का उपभोग करना है

           .                 राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयां निधियों के उपयोग की तिथि से 90 दिनों के भीतर एनएसटीएफडीसी को निर्धारित प्रपत्र में सहायता प्राप्त लाभार्थियों की सूची सहित उपयोगिता रिपोर्ट भेजेंगी

           .                 एनएसटीएफडीसी द्वारा निधियों के जारी होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर निधियों का उपयोग करने की स्थिति में राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयां तत्काल सारी राशि एनएसटीएफडीसी को वापस करेगी

9.             अनूसूचित जनजातियों द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रियाः-

         .                   पात्र अनुसूचित जनजाति आवेदक अपने संबंिधत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र से वहां स्थित राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र पर ऋण हेतु आवेदन कर सकते हैं

           .                 आवेदक संबंिधत राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जनजाति एवं आय प्रमाण-पत्र के साथ भूमि मालिकाना हक की एक प्रति संलग्न करेंगे     

           .                 आवेदक द्वारा राज्य चैनेलाइजिंग एजेंिसयों को इस आशय का वचन-पत्र प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है कि आवेदक द्वारा उसी कार्य के लिए किसी अन्य स्रोत से ऋण  नहीं लिया गया है

10.                 बैंकों के माध्यम से वित्तीय सहायताः पात्र अनुसूचित जनजाति के वनवासी भारतीय सैन्ट्रल बैंक, वनांचल ग्रामीण बैंक एव शारदा ग्रामीण बैंक की शाखाओं के माध्यम से भी वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते है।एनएसटीएफडीसी अन्य बैंकों के साथ भी पुनः वित्त प्रदान करने की व्यवस्था करता है बैंकों के नाम है- स्टेट बैंक ऑफ इंिडया, यूको बैंक, सिंिडकेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंिडया, देना बैंक, विजया बैंक एवं असम ग्रामीण विकास बैंक,बैतरणी ग्राम्य बैंक, झारखंड ग्रामीण बैंक,त्रिपुरा ग्रामीण बैंक, बड़ौदा गुजरात ग्रामीण बैंक एवं देना गुजरात ग्रामीण बैंक ये बैंक केवल स्व सहायता समूहों को सहायता देने के लिए पुनः वित्त की सुविधा ले रहे हैं (अनुसूचित जनजाति के वनवासियों के लिए तात्कालिक योजना को कार्यान्वित करने के लिए एनएसटीएफडीसी द्वारा इन बैंकों से भी संपर्क किया जाएगा )

11.       कार्यान्वयनः

.    लाभार्थियों की लक्षित कवरेज का लक्ष्यः 31.12.2012 के अनुसार, विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा 12.79 लाख अनुसूचित जनजातियों को टाइटल वितरित कर दिए गए हैं तथा करीब 14000 टाइटल वितरण हेतु तैयार   हैं एनएसटीएफडीसी की वित्तीय सहायता के अंतर्गत इन सभी वन अधिकार धारकों को कवर किया जाना प्रस्तावित है

.    धन की आवश्यकताः लगभग 12.90 लाख वन अधिकार धारकों को कवर किए जाने हेतु प्रति लाभार्थी अधिकतम 1 लाख रुपए के हिसाब से यदि सभी आवेदक आर्थिक लाभ लेते हैं तो धन की कुल अधिकतम आवश्यकता 12,900/-करोड़ रूपए हो सकती है फिर भी, यदि वास्तविक एकक लागत अथवा लाभर्थियों की संख्या में विभिन्नता होती है तो कुल धन की आवश्यकता उसी अनुपात में कम हो सकती है इस कुल धनराशि का कुछ हिस्सा केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा मिले सब्सिडी तथा शेष को एनएसटीएफडीसी के ऋण से पूरा किया जा सकता है एनएसटीएफडीसी को अपने ऋण अवयव के अंशदान हेतु अतिरिक्त इक्विटी समर्थन की आवश्यकता होगी

 

.    प्रशिक्षणः एनएसटीएफडीसी से वन अधिकार धारकों को भी संबंिधत क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण दिया जा सकता है

.     प्रोन्नतः लक्ष्य समूह तक पहुंचने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता होगी निगम इस उद्देश्य के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन करेगा और/अथवा अन्य माध्यमों को अपनाएगा

.     विपणनः लाभार्थियों को अपने उत्पादों को मार्केट तक पहुंचाने हेतु एनएसटीएफडीसी उनकी सहायता  करेगा ट्राइफेड तथा अन्य एजेंिसयां इस कार्य में सहयोग प्रदान करेंगी

 

 

 

By: PWT& FD