जनगणना 2001 के अनुसार देश की जनजातीय आबादी 8.43 करोड़ अर्थात कुल जनसंख्या का 8.2% है । जहां अन्य कमजोर वर्ग हर दृष्टि से संयत रूप से विकास कर रहे हैं उस सूची में जनजातीय जनसंख्या का विकास शिक्षा स्वास्नय इत्यादि की दृष्टि से काफी पीछे है । इस समस्या के संयोजन के साथ यह वंचित वर्ग भौगोलिक एवं सांस्कृतिक एकाकीपन भी झेल रहा है । अनुसूचित जनजातियों के सशक्तिकरण पर ध्यान केद्रित करने की दृष्टि से सन 2001 में अनुसूचित जनजातियां जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय गरीबी रेखा आय सीमा से दुगुनी तक है को रियायती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए एनएसटीएफडीसी की स्थापना की गई । मैंने दिनांक 01.04.2001 से एनएसटीएफडीसी के अपयक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला है । मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि निगम ने 8 वर्षो की इस छोटी अवधि में 24 लाख से अधिक अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों की तरफ सहायता का हाथ बढ़ाया है एवं लगभग 800 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मंजूर की है । इस उल्लेखनीय प्रयास के बावजूद निगम अधिक संवया में अनुसूचित जनजाति की आबादी को लाभ पहुंचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है । एनएसटीएफडीसी अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के आर्थिक उत्थान हेतु
विभिन्न योजनाएं उपलब्ध करता है । मियादी ऋण योजना के अंतर्गत 10.00 लाख रुपए तक की लागत वाली योजनाओं हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है जिस पर लाभार्थियों से 6%-8% प्रतिवर्ष रियायती ब्याज दर ली जा सकती है ।
आदिवासी महिला सशत्तिᆬकरण योजना एनएसटीएफडीसी के प्रमुख कार्यावयन में से एक है जो विशेषरूप से अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के सशत्तिᆬकरण हेतु बनाई गई है । इस योजना के अंतर्गत 50000/- रुपए तक की लागत वाली योजनाओं हेतु रियायती ब्याज दर 4% वार्षिक पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ।
एनएसटीएफडीसी की लघु ऋण योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों को भी सहायता प्रदान की जाती है । इस योजना के लिए कुछ सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रम बैंकों के माध्यम से भी निधियां उपलब्ध कराई जाती हैं । इस योजना के अंतर्गत प्रति सदस्य 15000/- रुपए की सीमा सहित प्रति स्व सहायता समूह ओंधकतम 3.00 लाख रुपए तक की ऋण दी जा सकती है ।
निगम विपणन समर्थन सहायता योजना भी चलाता है जिसके तहत लघु वन उत्पाद एवं अन्य जनजातीय उत्पादों के प्रापण/विपणन कार्य में लगे हुए संस्थानों को उनकी कार्यपूंजी आवश्यकता को वहन करने हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है ।
जैसाकि मेरे पूर्वाधिकारियों ने उन्नति के बीज बोए हैं एनएसटीएफडीसी दृढ़ता से अनुसूचित जनजातियों के सशत्तिकरण की ओर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा । हम अनुसूचित जनजातीय आबादी के बीच एनएसटीएफडीसी योजनाओं के बारे में अधिक जागरूकता एवं जानकारी बढ़ाने के लिए भरपूर प्रयास करेंगे । निगम पहले ही विभिन्न प्रान्तीय एवं जनजातीय भाषाओं में मार्गदशिकाएं उपलब्ध करा चुका है ।
इस इंटरनेट युग में यह महत्वपूर्ण है कि माउस के एक क्लिक करने पर सूचना उपलब्ध होती है । इस वेबसाइट को पुन डिजाईन किया गया है ताकि इसे ज्यादा प्रयोत्तधक अनुकूल (यूजर फ्रेडली) बनाया जा सके । साथ ही इस सीट पर एनएसटीएफडीसी योजनाओं के बारे में सूचना के साथ-साथ माडल परियोजना रुपरेखाएं भी सुलभ उपयोग के लिए उपलब्ध हैं ।
मैं आशा करता हूं कि सभी अंशधारक अनुसूचित जनजातियों के विकास हेतु जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली संस्थाएं इस साईट से लाभान्वित होंगे । मैं सभी संबंधित लोगों से अपील करूंगा कि वह एनएसटीएफडीसी योजनाओं के बारे में लक्ष्य समूहों के बीच उनकी आर्थिक
उन्नति हेतु ओंधक जागरूकता पैदा करने में हमारे इस प्रयास में हमारा साथ दें ।
जी . एस .सूद
(अध्यक्ष एवम प्रबन्ध् निदेशक )
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